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Showing posts from July, 2019
कौन आएगा किसको आना है वक़्त  मरहम  है  दर्द  शाना  है जीतने की है शर्त और ज़िद भी अब  तो रिश्तों को हार जाना है ले के फ़रियाद आए जिसके ख़िलाफ़ वो   ही   मुंसिफ़  है  वो  ही  थाना  है भूल    जाती    हैं    शक़्ल    दीवारें कितना मुश्किल ये घर चलाना है दर-ब-दर फिर रहा हूँ ले के वफ़ा मुझको   दुश्मन   किसे  बनाना  है चाहिए  सिर्फ़ एक अदद कंधा हर किसी का कोई निशाना है मौत सा'नी है ज़िन्दगी अव्वल दोनों  मिसरे  में  रब्त  लाना है