एक गज़ल
आपसे राब्ता भी नहीं।
आपसे हम खफ़ा भी नहीं।।
हैं नहीं फासले दरमियां।
मिलने का सिलसिला भी नहीं।।
इस क़दर दूर वो हैं हुए।
पहुँचे उन तक सदा भी नही।।
निस्बतें अब नहीं दरमियां।
पर हुए हम जुदा भी नहीं।।
प्यार रह जाए बन इक घुटन।
हर घड़ी आजमा भी नहीं।।
ऐब सबके गिनाते फिरे।
कोई इतना खरा भी नहीं।।
बेवफ़ा जितनी है ज़िन्दगी।
उतनी शायद कज़ा भी नही।।
कोई वादा खुशी में न कर।
क्रोध में फैसला भी नहीं।।
सोई इंसानियत दे जगा।
आता वो जलजला भी नहीं।।
आपसे हम खफ़ा भी नहीं।।
हैं नहीं फासले दरमियां।
मिलने का सिलसिला भी नहीं।।
इस क़दर दूर वो हैं हुए।
पहुँचे उन तक सदा भी नही।।
निस्बतें अब नहीं दरमियां।
पर हुए हम जुदा भी नहीं।।
प्यार रह जाए बन इक घुटन।
हर घड़ी आजमा भी नहीं।।
ऐब सबके गिनाते फिरे।
कोई इतना खरा भी नहीं।।
बेवफ़ा जितनी है ज़िन्दगी।
उतनी शायद कज़ा भी नही।।
कोई वादा खुशी में न कर।
क्रोध में फैसला भी नहीं।।
सोई इंसानियत दे जगा।
आता वो जलजला भी नहीं।।
One of the best kalam written by young shayar Sushant.... Kudos!!!
ReplyDeleteThanks dear 😊😊
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