एक ख़याल

याद की वो बदलियाँ हुईं हैं आज फिर सघन
भागता है आज फिर अतीत की तरफ ये मन
बचपने के खेल साथी मीत वो गली डगर
ज़िन्दगी थी छाँव जैसी उम्र की न थी तपन

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